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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 40
श्रुताप्सरोगीतिरपि क्षणेऽस्मिन्हरः प्रसङ्ख्यानपरो बभूव । आत्मेश्वराणां न हि जातु विघ्नाः समाधिभेदप्रभवो भवन्ति ॥
इस समय अप्सराओं के गीत सुनकर भी शिव अपने ध्यान में लीन रहे, क्योंकि आत्मसंयमी पुरुषों के लिए विघ्न कभी भी समाधि को भंग नहीं कर पाते।
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