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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 39
पर्याप्तपुष्पस्तबकस्तनाभ्यः स्फुरत्प्रवालौष्ठमनोहराभ्यः । लतावधूभ्यस्तरवोऽप्यवापुर्विनम्रशाखाभुजबन्धनानि ॥
फूलों के गुच्छों से युक्त स्तनों और प्रवाल के समान अधरों वाली लताओं रूपी वधुओं को वृक्षों ने भी अपनी झुकी हुई शाखाओं से आलिंगन किया।
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