गीतों के बीच श्रम से उत्पन्न जलकणों से भीगी हुई पत्तियों के समान शोभायुक्त और पुष्परस से मतवाले नेत्रों वाली अपनी प्रिया के मुख को किम्पुरुष ने चूमा।
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