मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 38
गीतान्तरेषु श्रमवारिलेशैः किश्चित्समुच्वासितपत्रलेखम् । पुष्पासवाघूर्णितनेत्रशोभि प्रियामुखं किम्पुरुषश्चचुम्बे ॥
गीतों के बीच श्रम से उत्पन्न जलकणों से भीगी हुई पत्तियों के समान शोभायुक्त और पुष्परस से मतवाले नेत्रों वाली अपनी प्रिया के मुख को किम्पुरुष ने चूमा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें