मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 35
तं देशमारोपितपुष्पचापे रतिद्वितीये मदने प्रपन्ने । काष्ठागतस्नेहरसानुविद्धं द्वन्द्वानि भावं क्रियया विवन्नुः ॥
जब रति सहित कामदेव ने उस स्थान में पुष्पधनुष धारण किया, तब वृक्षों में निहित प्रेमरस से युक्त युगलों ने अपने भावों को क्रियाओं द्वारा व्यक्त किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें