आम की कोंपलों का रस पीकर कंठ में कषाय लिए नर कोकिल ने जो मधुर कूक की, वह मनस्विनी स्त्रियों के मन को विचलित करने में समर्थ कामदेव के वचन के समान हो गई।
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