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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 29
बालेन्दुवकाण्यविकासभावाद्वभुः पलाशान्यतिलोहितानि । सद्यो वसन्तेन समागतानां नखक्षतानीव वनस्थलीनाम् ॥
अभी पूर्ण विकसित न होने के कारण पलाश के पुष्प अत्यंत लाल दिखाई देते थे, मानो वसंत के आगमन से वनस्थलियों पर नखों के चिह्न पड़ गए हों।
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