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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 25
कुबेरगुप्तां दिशमुष्णरश्मौ गन्तुं प्रवृत्ते समयं विलय । दिग्दक्षिणा गन्धवहं मुखेन व्यलीकनिः श्वासमिवोत्ससर्ज ॥
जब सूर्य कुबेर की दिशा की ओर बढ़ने लगा, तब दक्षिण दिशा ने सुगंधित वायु को ऐसे छोड़ा जैसे कोई श्वास लेता हो।
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