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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 24
तस्मिन्वने संयमिनां मुनीनां तपः समाधेः प्रतिकूलवर्ती । सङ्कल्पयोनेरभिमानभूतमात्मानमाधाय मधुर्जजृम्भे ॥
उस वन में, जहाँ संयमी मुनियों की तपस्या और समाधि के प्रतिकूल वातावरण था, वसंत ने कामदेव के अभिमानरूप प्रभाव को धारण कर अपने को प्रकट किया।
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