इन्द्र ने उसे अपने आसन के निकट बैठने को कहा, तब उसने भूमि पर स्थान ग्रहण कर, सिर झुकाकर स्वामी की कृपा स्वीकार करते हुए इस प्रकार बोलना आरम्भ किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।