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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 11
अथोरुदेशादवतार्य पाद माक्रान्तिसम्भावितपादपीठम् । सङ्कल्पितार्थे विवृतात्मशक्तिमाखण्डलः काममिदं बभाषे ॥
तब इन्द्र ने अपने पैर को उचित आसन पर रखकर, संकल्पित कार्य के लिए अपनी शक्ति प्रकट करते हुए कामदेव से यह कहा।
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