आप जगत के कारण होकर भी अकारण हैं, अंत होकर भी अनंत हैं, आदि होकर भी अनादि हैं और स्वयं ही जगत के ईश्वर हैं जिनका कोई अन्य ईश्वर नहीं है।
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