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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 7
स्त्रीपुंसावात्मभागौ ते भिन्नमूर्तेः सिसृक्षया । प्रसूतिभाजः सर्गस्य तावेव पितरौ स्मृतौ ॥
सृष्टि की इच्छा से आपके ही दो भाग स्त्री और पुरुष रूप में विभक्त हुए, और वही सृष्टि के जनक माने गए।
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