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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 62
इति व्याहृत्य विबुधान् विश्वयोनिस्तिरोदधे । मनस्याहित कर्तव्यास्तेऽपि देवा दिवं ययुः ॥
ऐसा कहकर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा अदृश्य हो गए और देवता अपने मन में कर्तव्य निश्चित कर स्वर्ग को लौट गए।
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