स हि देवः परं ज्योतिस्तमः पारे व्यवस्थितम् । परिच्छिन्नप्रभावर्द्धिर्न मया न च विष्णुना ॥
वह देव परं ज्योति है जो अज्ञान के पार स्थित है, और जिसकी शक्ति न मुझसे न ही विष्णु से सीमित की जा सकती है।
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