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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 53
वचस्यवसिते तस्मिन्ससर्ज गिरमात्मभूः । गर्जितानन्तरां वृष्टि सौभाग्येन जिगाय सा ॥
उनके वचन समाप्त होने पर ब्रह्मा ने वाणी प्रकट की, जो गर्जना के बाद होने वाली वर्षा की भाँति सौभाग्यशाली थी।
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