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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 52
गोत्पारं सुरसैन्यानां ये पुरस्कृत्य गोत्रभित् । प्रत्यानेष्यति शत्रुभ्यो वन्दीमिव जयश्रियम् ॥
जो इन्द्र को आगे रखकर देवसेना को संकट से पार ले जाकर शत्रुओं से विजयलक्ष्मी को बंदिनी के समान वापस लाएगा।
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