यदमोघमपामन्तरुप्तं बीजमज त्वया । अतश्चराचरं विश्व प्रभवस्तस्य गीयसे ॥
हे अज, आपने जल में जो अचूक बीज स्थापित किया, उसी से यह चर-अचर जगत उत्पन्न हुआ, इसलिए आप उसके कारण कहे जाते हैं।
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