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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 42
वीज्यते स हि संसुप्तः श्वाससाधारणानिलैः । चामरैः सुरवन्दीनां वाष्पसीकरवर्षिभिः ॥
वह सोते समय देवांगनाओं द्वारा चामरों से ऐसे हवा किया जाता है, जिनसे श्वास के समान वायु और आँसुओं की बूँदें बरसती हैं।
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