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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 37
तस्योपायनयोग्यानि रत्नानि सरितां पतिः । कथमप्यम्भसामन्तरा निष्पत्तेः प्रतीक्षते ॥
नदियों का स्वामी समुद्र उसके लिए उपहार योग्य रत्नों को जल के भीतर ही किसी प्रकार उत्पन्न होने की प्रतीक्षा करता है।
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