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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 35
व्यावृत्तगतिरुद्याने कुसुमस्तेयसाध्वसात् । न वाति वायुस्तत्पार्श्वे तालवृन्तानिलाधिकम् ॥
उसके उद्यान में फूलों की चोरी के भय से वायु का प्रवाह रुक जाता है और वह केवल पंखे की हवा के समान हल्का ही बहता है।
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