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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 33
पुरे तावन्तमेवास्य तनोति रविरातपम् । दीर्घिकाकमलोन्मेषो यावन्मात्रेण साध्यते ॥
सूर्य उसके नगर में उतनी ही गर्मी फैलाता है जितनी किसी सरोवर के कमलों को खिलाने के लिए आवश्यक होती है।
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