ततो मन्दानिलोडूतकमलाकरशोभिना । गुरु नेत्रसहस्रेण नोदयामास वासवः ॥
तब मंद पवन से हिलते कमलों की शोभा वाले इन्द्र ने अपने सहस्र नेत्रों से ब्रह्मा की ओर दृष्टि उठाई।
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