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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 25
पर्याकुलत्वान्मरुतां वेगभङ्गोऽनुमीयते । अम्भसामोघसंरोधः प्रतीपगमनादिव ॥
मरुतों की व्याकुलता से उनके वेग का टूटना अनुमानित होता है, जैसे जल के प्रवाह का रुक जाना विपरीत दिशा में जाने से होता है।
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