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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 23
यमोऽपि विलिखन्भूमिं दण्डेनास्तमितत्विषा । कुरुतेऽस्मिन्नमोघेऽपि निर्वाणालातलाघवम् ॥
यम भी अपने दंड से भूमि को कुरेदते हुए, अपनी क्षीण हुई शक्ति के कारण, अपने अचूक दंड को भी बुझी हुई अग्नि के समान हल्का बना रहे हैं।
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