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कुमारसंभवम् • अध्याय 2 • श्लोक 22
कुबेरस्य मनः शल्यं शंसतीव पराभवम् । अपविद्धगदो बाहुर्भग्नशाख इव द्रुमः ॥
कुबेर का हाथ, जिससे गदा छूट गई है, मानो उसके मन के दुःख और पराजय को प्रकट कर रहा है, जैसे टूटी हुई शाखा वाला वृक्ष।
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