त्वमेव हव्यं होता च, भोज्यं भोक्ता च शाश्वतः । वेद्य च वेदिता चासि, ध्याता ध्येयं च यत्परम् ॥
आप ही हव्य हैं, होता हैं, भोज्य हैं और भोक्ता हैं; आप ही वेद्य, वेत्ता, ध्याता और परम ध्येय हैं।
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