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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 50
उद्योतिताम्बरदिगन्तरमंशुजालैः शक्तिः पपात हृदि तस्य महासुरस्य । हर्षाश्रुभिः सह समस्तदिगीश्वराणां शोकोष्णबाष्पसलिलैः सह दानवानाम् ॥
उस शक्ति के तेज से आकाश और दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं और वह महादैत्य के हृदय में जा लगी; इससे दिक्पाल हर्षाश्रु बहाने लगे और दानव शोक के आँसू बहाने लगे।
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