उस शक्ति के तेज से आकाश और दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं और वह महादैत्य के हृदय में जा लगी; इससे दिक्पाल हर्षाश्रु बहाने लगे और दानव शोक के आँसू बहाने लगे।
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