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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 42
विद्युल्लता वियति वारिदवृन्दमध्ये गम्भीरभीषणरवैः कपिशीकृताशा । घोरा युगान्तचलितस्य भयङ्कराऽथ कालस्य लोलरसनेव चमञ्चकार ॥
मेघों के बीच चमकती हुई बिजली प्रलयकाल में चलायमान काल की लोल जिह्वा के समान भयानक प्रतीत हो रही थी।
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