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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 41
घोरान्धकारनिकरप्रतिमो युगान्तकालानलप्रबलधूमनिभो नभोन्ते । गर्जारवैर्विघटयन्नवनीधराणां शृङ्गाणि मेघनिवहो घनमुज्जगाम ॥
प्रलयकालीन अग्नि के धुएँ के समान घोर अंधकार से युक्त मेघसमूह आकाश में उठे और अपनी गर्जना से पर्वतों के शिखरों को कंपाने लगे।
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