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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 39
गाढाद्भयाद्वियति विद्रुतखेचरेण दीप्तेन तेन दहनेन सुदुःसहेन । दन्दह्यमानमखिलं सुरराजसैन्य-मत्याकुलं शिवसुतस्य समीपमाप ॥
उस असह्य अग्नि से भयभीत होकर आकाशचारी भाग गए और जलती हुई देवसेना अत्यन्त व्याकुल होकर शिवपुत्र के पास पहुँची।
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