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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 34
तेनोज्झितं सकलमेव सुरेन्द्रसैन्यं स्वास्थ्यं प्रपद्य पुनरेव युधि प्रवृत्तम् । दृष्ट्वासृजद्दहनदैवतमस्त्रमिद्ध-मुद्दीप्तकोपदहनः सहसा सुरारिः ॥
उसके प्रभाव से देवसेना पुनः स्वस्थ होकर युद्ध में प्रवृत्त हुई; इसे देखकर क्रोधित दैत्य ने अग्निदेव का प्रज्वलित अस्त्र छोड़ दिया।
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