मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 33
इत्थं विलोक्य सुरसैन्यमथो अशेषं दैत्येश्वरेण विधुरीकृतमस्त्रयोगात् । स्वर्लोकनाथकमलाकुशलैकहेतु-र्दिव्यं प्रभावमतनोदतनुः स देवः ॥
इस प्रकार दैत्यराज द्वारा अस्त्रबल से विह्वल की गई सम्पूर्ण देवसेना को देखकर, स्वर्ग के रक्षक कार्त्तिकेय ने अपना दिव्य प्रभाव प्रकट किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें