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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 32
तेनाहतास्त्रिदशसैन्यपदातयोऽपि स्रस्तायुधाः सुविधुराः परुषं रसन्तः । वात्साविवर्तदलवद्भममेत्य दूरै निष्पेतुरम्बरतलाद्वसुधातलेऽस्मिन् ॥
उस वायु से आहत देवसेना के पैदल सैनिक भी अपने अस्त्र छोड़कर अत्यन्त व्याकुल होकर, पत्तों की भाँति उड़ते हुए आकाश से दूर पृथ्वी पर गिर पड़े।
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