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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 31
हित्वायुधानि सुरसैन्यतुरङ्गवाहा वातेन तेन विधुराः सुरसैन्यमध्ये । शस्त्राभिघातमनवाप्य निपेतुरुर्त्यां स्वीयेषु वाहनवरेषु पतत्सु सत्सु ॥
उस प्रचंड वायु से व्याकुल होकर देवसेना के घुड़सवार अपने आयुध छोड़कर, बिना शस्त्राघात के ही, अपने गिरते हुए श्रेष्ठ वाहनों सहित भूमि पर गिर पड़े।
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