मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 3
जम्भद्विषत्प्रभृतिदिक्पतिचापमुक्ता बाणाः शिताः दनुजनायकबाणसङ्घान् । अह्वाय ताक्ष्यनिवहा इव नागपूगा-न्सद्यो विचिच्छिदुरले कणशो रणान्ते ॥
इन्द्र आदि दिक्पालों द्वारा छोड़े गए तीक्ष्ण बाणों ने दैत्यराज के बाणसमूहों को ऐसे काट डाला जैसे गरुड़ सर्पों के समूहों को नष्ट कर देता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें