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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 26
सन्धानमात्रमपि यस्य युगान्तकाल-भूतभ्रमं पुरुषभीषणधोरघोषः । उद्धृतधूलिपटलैः पिहिताम्बराशः प्रच्छन्नचण्डकिरणो व्यसरत्समीरः ॥
उस अस्त्र के संधान मात्र से ही प्रलयकाल जैसा भयंकर स्वर उत्पन्न हुआ, धूल के बादलों से आकाश ढक गया और सूर्य की किरणें छिप गईं।
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