सुरशत्रु के अनन्त बाणों की गर्जना से भयभीत होकर और उनकी चमक से आच्छादित होकर सम्पूर्ण देवसेना अंधकारमय हो गई, जिससे शिवपुत्र की दृष्टि कहीं स्थिर न हो सकी।
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