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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 14
एवं त्वमेव तनयोऽसि गिरीशगौर्योः किं यासि कालविषयं विषमैः शरैर्मे । सङ्ग्रामतोऽपसर जीव पितुर्जनन्या स्तूर्ण प्रविश्य वरमङ्कतले विधेहि ॥
तुम शिव और पार्वती के पुत्र हो, फिर मेरे भयंकर बाणों के सामने मृत्यु की ओर क्यों जा रहे हो? युद्ध से हटकर अपने माता-पिता की गोद में जाकर जीवन बिताओ।
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