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कुमारसंभवम् • अध्याय 17 • श्लोक 12
प्रक्षुभ्यमाणमवलोक्य दिगीशसैन्यं शम्भोः सुतं कलहकेलिकुतूहलोत्कम् । उद्दामदोः कलितकार्मुकदण्डचण्डः प्रोवाच वाचमुपगम्य स कार्त्तिकेयम् ॥
दिग्पालों की सेना को विचलित देख, युद्ध के उत्सुक कार्त्तिकेय के पास जाकर, उग्र भुजबल से युक्त दैत्य ने उससे कहा।
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