मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 8
विसृजन्तो मुखैर्ध्वाला भीमा इव भुजङ्गमाः । विसृष्टाः सुभटै रुष्टैर्योम व्यानशिरे शराः ॥
क्रोधित योद्धाओं द्वारा छोड़े गए बाण ऐसे प्रतीत होते थे मानो मुख से ज्वाला निकालते हुए भयानक सर्प आकाश में फैल गए हों।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें