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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 6
निर्दयं खङ्गभिन्नेभ्यः कवचेभ्यः समुत्थितैः । आसन्ध्योमदिशस्तूलैः पलितैरिव पाण्डुराः ॥
निर्दयता से तलवारों द्वारा कटे हुए कवचों के टुकड़ों से दिशाएँ और आकाश ऐसे श्वेत हो उठे मानो वृद्धों के केश हों।
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