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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 46
रथिनो रथिभिर्बाणैर्हतप्राणा दृढासनाः । क्षतकार्मुकसन्धानाः सप्राणा इव मेनिरे ॥
रथी, बाणों से मारे जाने पर भी, रथ पर दृढ़ बैठे हुए और धनुष पर बाण चढ़ाए ऐसे प्रतीत होते थे मानो अभी जीवित हों।
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