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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 4
पठतां वन्दिवृन्दानां प्रवीरा विक्रमावलीम् । क्षणं विलम्ब्य चित्तानि ददुर्युद्धोत्सुकाः पुरः ॥
वन्दियों द्वारा उनके पराक्रम का गान सुनकर, युद्ध के इच्छुक वीर क्षण भर रुककर अपने मन को स्थिर कर आगे बढ़े।
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