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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 30
शस्त्रच्छिन्नगजारोहा विभ्रमन्त इतस्ततः । युगान्तवातचलिताः शैला इव गजा बभुः ॥
शस्त्रों से घायल गजारोही इधर-उधर भटकने लगे और हाथी प्रलयकालीन वायु से हिलते पर्वतों के समान प्रतीत होने लगे।
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