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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 28
शिरांसि वरयोधानामर्धचन्द्रहृतान्यलम् । आ‌द्धाना भृशं पादैः श्येना व्यानशिरे नभः ॥
श्रेष्ठ योद्धाओं के अर्धचन्द्राकार बाणों से कटे सिरों को बाज अपने पैरों में पकड़कर आकाश में ले गए।
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