बहुभिः सह युद्धा वा परिभ्रम्य रणोल्बणाः । उद्दिश्य तानुपेयुः केऽपि ये पूर्ववृता रणे ॥
कुछ योद्धा अनेक शत्रुओं से युद्ध करते हुए रणभूमि में घूमते रहे और फिर उन्हीं की ओर बढ़े जिनसे पहले युद्ध कर चुके थे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।