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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 17
प्रज्वलत्कान्तिचक्राणि चक्राणि वरचक्रिणाम् । चण्डांशुमण्डलश्रीणि रणव्योमनि बभ्रमुः ॥
श्रेष्ठ चक्रधारियों के चक्र अपनी प्रज्वलित आभा से युद्धाकाश में सूर्य के समान चमकते हुए घूम रहे थे।
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