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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 15
खङ्गाः शोणितसन्दिग्धा नृत्यन्तो वीरपाणिषु । रजोघने रणेऽनन्ते विद्युतां वैभवं दधुः ॥
वीरों के हाथों में नाचती हुई रक्तरंजित तलवारें धूल से भरे युद्ध में बिजली के समान चमक रही थीं।
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