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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 14
गृहीताः पाणिभिर्वीरैर्विकोशाः खङ्गराजयः । कान्तिजालच्छलादाजौ व्यहसन्सम्मदादिव ॥
वीरों के हाथों में लिए गए तलवारें अपनी चमक से युद्ध में ऐसे प्रतीत होती थीं मानो हँस रही हों।
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