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कुमारसंभवम् • अध्याय 16 • श्लोक 11
ज्वलद‌ग्निमुखैर्वाणैर्नीरन्यैरितरेतरम् । उच्चैवैमानिका व्योग्नि कीर्णे दूरमपासरन् ॥
अग्निमुख बाणों से आकाश भर जाने पर विमान दूर हट गए।
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